02

Mulakat #2

एक प्यारा सा घर बाहर चारो तरफ पेड़ -पौधै और हरियाली फेली है main Gate के बाहर बडे़ अक्षरो मे लिखा था चोहान family। तभी गेट अंदर की तरफ खोलकर साँची आती है उसका चेहरा लटका हुआ था । जैसे आज उसका स्कुल बाग बहुत भारी हो ।कंधे नीचे की तरफ लटके हुए लग रहे थे वो घर का दरवाजा खोलकर अंदर आती है ।

मै घर आ ग ई । साँची उदास होकर अपने जूते निकालते हुए कहती है और बैग निकालकर रख देती है ।तुम आ ग ई ,कैसा दिन रहा आज का ? एक प्यारी आवा़ँज उसके कानो मे पड़ती है। ये है साँची की mom साधना । जो दिखने मे बहुत खुबशुरत है और modern ख्यालो की है उनका अपना बिज़निस है वो और उनके पति साथ मिलकर एक छोटा सा बिज़निस चलाते है। ये दोनो माँ बेटी एक जैसे स्वाभाव की है और चेहरा भी काफी मेच करता है उनका ।

क्या हुआ ऐसे चेहरा क्यु लटका हुआ है? बोलो । साँची भागकर उनके गले लगती है । मम्मा मैंने बहुत याद किया आज आपको मुझे बिलकुल स्कुल मे अच्छा नही लग रहा था। अच्छा जी ,आज क्या स्कुल मे ऐसा था जो तुमने मुझे याद किया । बस ऐसे ही ,साँची ने मुस्कुराते हुए कहा । तो ठीक है अब उपर जाकर fresh हो जाओ । ऐसा कहकर साधना किचन मे जाती है और fruts काटने लगती है।

आप fruts किस के लिए काट रहे हो मम्मा .. साँची ने पुछा ।अचानक उपर से आवा़ज आती है । मम्मा मुझे साफ तोलिया चाहिए । ऐ आवा़ज को सुनकर साँची के कान खडे़ हो ग्ए। ये तो सचिन की आवा़ज है मम्मा वो वापस आ गया क्या ? हाँ वो अभी थोडी़ देर पहले ही आया है । साधना ने मुस्कुराते हुए कहा । और बडा़ भाई है तुम्हारा कितनी बार कहा है नाम मत लिया करो उसका ।

Sorry मम्मा साँची भाडते हुए किचन मे आई । ये Fruts भाई के लिए है । हाँ अभी उसने कुछ खाया नही साधना बोली । तो ये मे दे आती हूँ साँची frut bowl हाध मे लेकर कहा । पहले fresh तो हो जाओ । नही मुझे उससे मिलना है और भागते हुए सिढियो की तरफ उपर चली ग्ई।

अचानक जोर से दरवाजा़ खुलता है । सचिन तुम आ ग,ए । देखो मै तुम्हारे लिए मे fruts लाई हूँ । और सामने बैठे इंसान के पलटते ही .............

उसकी आँखे बडी़ हो जाती है सामने बैठे इंसान को देखकर एक दम ,साँची बोल पडी़ ।

तुम कितने Handsame लग रहे हो , तुमने plasticsergery करवा ली ।

पर मैने sergery नही कर वाई । सामने बैठा लडका बोलो । साँची अभी भी सामने की तरफ देख रही थी । तभी,' ये छोटी डायन तू यहाँ क्या कर रही है। पीछे से आवाज़ आई । अचानक साँची का ध्यान टुटा । पीछे मुडकर तुम यहाँ हो तो ये, कौन है। वो मेरा दोस्त है उसकी नज़र एक बार वापस Gai । Hey सामने बैठेलडके ने कहा । वैसे तु क्या कह रही थी । handsame -sergery वोल रही थी। और तु यहाँ क्या कर रही है तु तो यहाँ आती नही थी तुझे मेरा कमरा ही नही पसंद था । तो यहाँ कर क्या रही है ? हं कही वापस कुछ कांड तो नही कर दिया तुने बोल ?

ऐसा कुछ भी नही है और मुस्कुराकर वो तुम इतने दिनो बाद घर आए हो ना तो बस .. तो बस क्या, तू और मुझसे मिलने आए ये तो हो नही सकता चल बता कुछ किया है ना तूने इसलिए यहाँ आई है ना ।

, सच मे मै तो अपने भाई से मिलने आई हूँ मुझे तुम्हारी बहुत याद आती थी । मैने तो मम्मा से भी कहा था कि आप को वापस बुला ले उसने मासूम सी सकल बनाकर कहा ।

अच्छा जो लडकी फोन पर कभी बात नही करती वो मुझे याद कर रही थी ? सचिन कमर पर हाथ रखकर कहा और थोडा़ नीचे झुक कर , चल अब सच बता कुछ काम है ना और तु कब से भाई कहने लगी । तुम मेरे भाई हो तो भाई ही कहूगी ना उसने प्यार से कहा । अचानक

साँची ने पीछे देखा वो लड़का वापस बुक पढ़ने लगा । सचिन की फिर आवा़ज आई बोल ना ।

अगर आप सभी को मेरी कहानी पसंद आए तो कमेंट करना मत भुलना । ✍️✍️🙏🙏

Write a comment ...

Write a comment ...

एहसासों की किताब 💖 with cup girl

Story whriter / creator